CBS तकनीक (Character Build-up Strategy)
CBS क्या है?
CBS एक ऐसा ब्लूप्रिंट है जिससे हम स्क्रिप्ट लिखने से पहले ही कैरेक्टर की रूह तैयार करते हैं। यह तकनीक एक काल्पनिक पात्र को ‘जीते-जागते इंसान’ में बदल देती है।
फिल्में इसका उपयोग कैसे करती हैं? (Basic Pillars)
एक डायरेक्टर CBS तकनीक का इस्तेमाल करके कैरेक्टर में ये 4 मुख्य गुण डालता है:
1. हर उम्र से जुड़ाव (Universal Relatability)
CBS की सबसे बड़ी ताकत है—‘अपनापन’। हम कैरेक्टर को ऐसे गढ़ते हैं कि हॉल में बैठा हर व्यक्ति—चाहे वह बच्चा हो, जवान हो या बुजुर्ग—उसमें ‘खुद को’ देखे।
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एक बच्चा उसे देखकर हीरो बनना चाहता है।
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एक युवा उसमें अपना संघर्ष देखता है।
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बुजुर्ग उसमें अपनी जिम्मेदारी देखता है।
जब दर्शक को कैरेक्टर में अपनी परछाई दिखने लगती है, तो वह फिल्म सिर्फ फिल्म नहीं रहती, वह उनकी ‘अपनी कहानी’ बन जाती है। यही वह चीज़ है जो कैरेक्टर को दिल में छा जाने पर मजबूर कर देती है।
2. विजुअल हुक (Visual Identity)
हम कैरेक्टर को एक ऐसी ‘दिखावट’ या स्टाइल देते हैं जो भीड़ से अलग हो।
चाहे उसका चलने का तरीका हो या कपड़े पहनने का ढंग—वह ऐसा होता है जिसे लोग कॉपी करना चाहें।
3. इमोशनल जिद्द (The Core Motive)
हीरो को क्या चाहिए, यह तो सबको पता होता है। लेकिन CBS यह तय करता है कि वह उस चीज़ को पाने के लिए किस हद तक जा सकता है।
यह ‘पागलपन’ ही ऑडियंस को इमोशनली बांध कर रखता है।
4. आवाज़ और अंदाज़ (Unique Voice)
उसका बोलने का लहज़ा और संवाद ऐसा डिजाइन किया जाता है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी उसके डायलॉग लोगों की जुबान पर चढ़े रहें।
5. एक्टर्स और स्टार्स के लिए इसका महत्व
जब एक एक्टर देखता है कि डायरेक्टर ने CBS तकनीक का इस्तेमाल किया है, तो उसे समझ आ जाता है कि यह रोल उसे घर-घर में पहचान दिलाएगा।
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यह तकनीक एक डूबते हुए सितारे को वापस चमक दे सकती है क्योंकि ऑडियंस उसके साथ इमोशनली जुड़ जाती है।
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यही कारण है कि बड़े एक्टर्स ऐसे रोल्स के लिए फीस की परवाह नहीं करते—क्योंकि पैसा खर्च हो जाता है, लेकिन CBS से बना ‘फैन बेस’ और ‘प्यार’ जीवन भर साथ रहता है।