ABC Element in Filmmaking

ABC एलिमेंट: 

ऑडियंस को कुर्सी से चिपकाने का फार्मूला फिल्म बोरिंग क्यों होती है? अक्सर लोग कहते हैं कि कहानी अच्छी नहीं थी, इसलिए फिल्म नहीं चली। लेकिन सच यह है कि कहानी नहीं, ‘सीन’ (Scene) बोरिंग थे। अगर आप चाहते हैं कि ऑडियंस आपकी फिल्म देखते समय अपनी पलकें झपकाना भी भूल जाए और अपनी कुर्सी से हिलने का नाम न ले, तो आपको अपनी स्क्रिप्ट के हर एक सीन में “ABC एलिमेंट” डालना होगा। यह वह जादुई फार्मूला है जिसे अगर आपने मास्टर कर लिया, तो ऑडियंस का रिमोट हाथ में लेने का मन ही नहीं करेगा।

A = Attraction (आकर्षण) 

सीन का पहला सेकंड। यह वह चुंबक है जो दर्शक की गर्दन पकड़कर उसे स्क्रीन की तरफ खींच लेता है। सीन शुरू होते ही कुछ ऐसा होना चाहिए—चाहे वह कोई विजुअल हो, कोई आवाज़ हो, या कोई चौंकाने वाली बात—जो ऑडियंस के दिमाग में तुरंत एक सिग्नल भेजे: “रुको! यहाँ कुछ दिलचस्प होने वाला है।” अगर A नहीं है, तो ऑडियंस रील स्क्रॉल कर देगी या चैनल बदल देगी।

B = Barrier (बाधा) 

सीन का मध्य भाग। सीधी लकीर में चलने वाली कहानी किसी को पसंद नहीं आती। हीरो या कैरेक्टर जो चाहता है, उसके रास्ते में एक दीवार (Barrier) खड़ी होनी चाहिए। यह बाधा जितनी बड़ी होगी, ऑडियंस की धड़कनें उतनी ही तेज होंगी। “क्या वह बच पाएगा?” =”क्या उसे वह मिलेगा?” जब तक रास्ते में ‘कांटे’ नहीं होंगे, तब तक मंजिल पाने का मज़ा ऑडियंस को महसूस नहीं होगा। ‘B’ ही वह तत्व है जो कहानी में जान डालता है।

C = Curiosity (जिज्ञासा) 

सीन का अंत। सबसे बड़ी गलती फिल्ममेकर्स यहीं करते हैं—वे सीन को पूरा ‘खत्म’ कर देते हैं। लेकिन ABC का नियम कहता है—सीन खत्म करो, लेकिन बात अधूरी छोड़ो। आपको सीन के अंत में ऑडियंस के दिमाग में एक सवाल (Curiosity) छोड़ना है। एक ऐसी प्यास जगानी है कि वह मजबूर हो जाए यह सोचने पर कि—”अब आगे क्या होगा?” यही वह चीज़ है जो उसे अगले सीन तक खींच कर ले जाती है।

जब आप अपनी स्क्रिप्ट के हर सीन में ABC (आकर्षण, बाधा, और जिज्ञासा) का सही मिश्रण कर देते हैं, तो ऑडियंस का दिमाग ‘हैक’ हो जाता है। उन्हें पता भी नहीं चलता कि कब 2 घंटे बीत गए। एक साधारण राइटर सीन लिखता है, लेकिन एक मास्टर फिल्ममेकर ABC एलिमेंट के जरिए ऑडियंस के इमोशन्स को कंट्रोल करता है।

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